दीनू देख रहा है

डा देवेन्द्र दीपक


दीनू देख रहा है
दीनू को जो जानते हैं
वह सब जानते हैं
दीनू ची*ाांे को
कैसे और किस कोण से देखता है
पाठ में निहित अन्तर्पाठ को पढने में
दीनू बहुत निपुण है।
दीनू खुश है--
अश्वमेध का अश्व
दौड रहा है।
काफी लम्बा जय-क्षेत्र
उसने कर लिया पार
लगातार
दीनू को याद है
कितने हिचकोले खाते
गाडी इस मुकाम पर पहची है।
दीनू कह रहा है--
बंधु, इतिहास ने तुम्हें अपनी वंदना दी
उसे श्रद्धा से शीश झुका कर स्वीकार करो
माँ का आशीष फला
उसे भारत माता के चरणों में
समर्पित करना मत भूलो।
प्रभु से प्रार्थना में
शील और शुचिता की याचना करो।
एक नाम सुना होगा--राजनारायण
इतिहास ने उसे अपनी वंदना दी
उसने महज उसे एक खिलौना समझा
और अफरा-तफरी में उसे तोड दिया।
जानते हो इतिहास ने उसके साथ
क्या कुछ किया
उसे विस्मृति के डस्टबिन में फेंक दिया!
दीनू ने संकेत से
गद्दीनशीन साथियों को
अपने पास बुलाया और कहा--
तुम जहाँ बैठे हो
उसके एक ओर
काजल की कोठरी है
दूसरी ओर
सोने का कोठार!
जनकभाव से रहने में ही है भलाई!
कामना के तुरंग की लगाम
जरा कसकर पकडो
अपने सगे सम्बन्धियों से सावधान
वे ही कल तुम्हारी नाव के छेद बनेंगे।
दीनू देखा रहा है--
पार्टी के दरवाजे पर भीड लगी है
गाली देने वाले गुलदस्ता लिए खडे हैं
भीतर प्रवेश के लिए मचल रहे हैं
अपनी अपनी चाहत के साथ।
प्रवेश दो
लेकिन सोच समझकर
उसके और अपने अतीत को याद रखकर
आने वाला आतुर है
उसके दिमाग में कुर्सी है।
वह हमारे कार्यकर्ता की तरह
अनुशासन की पाइप लाइन में से
गुजरा बंदा नहीं है।
प्रवेश दो
लेकिन अपनों का बना रहे सम्मान
उनकी तपस्या को निराकार मत करो
वे नहीं होते
तो तुम क्या यहाँ खडे होते ?
दीनू देख रहा है--
लोगों के हाथों में सीढियाँ हैं
जाति की सीढी
धर्म की सीढी
वर्ग की सीढी
अंचल की सीढी
रिश्तों की सीढी
सबसे लंबी सीढी चाँदी की
ये सीढीयाँ आसंदी के लिए है
वे सब लोग नेपथ्य में है
जिनके पास नहीं कोई सीढी
एक और दृश्य भी देखा दीनू ने
कुछ लोग
उन्हीं सीढियों को तोड रहे हैं
जिन पर चढकर
वह कभी ऊपर छत पर आए थे।
दर्शन का पहला चरण
आचरण की देहरी को पवित्र करता है
पर यहां
दर्शन की जगह प्रदर्शन पर बल
दीनू देख रहा है--
सरकार किसी काम को लेकर
दो कदम आगे बढती है
कोई छुट भैया नेता
ऐसा कुछ बोल जाता है
कि सरकार चार कदम पीछे हटने को मजबूर
सोचने समझने की बात है
आज सब की पीठ पर इतिहास लदा है
पूर्वापर से मुक्त नहीं कोई।
जब भी जो कुछ बोले
पिनक में तुनक कर मत बोल
सोच विचार कर
आगा पीछे तौल कर बोल।
दीनू आज बहुत प्रसन्न है
बहुत दिनों बाद वह इतना प्रसन्न दिखा
आजादी के बाद से
धर्मनिरपेक्षता की बनावटी पगडी पहन
सम्प्रदायिकता के चाबुक से
देश भक्तों खूब धुनाई हुई!
यह सिलसिला सालों साल चला
सबको खूब खला।
गजब हो गया
देखते ही देखते
वह नकली पगडी खुल गई
चाबुक की खत्म हो गई चटक
ठसक के साथ मुक्ति प्रकट हो गई!
गजब हो गया
जो अकड दिखाते साथ छोड गए थे
सिर झुकाए वापस लौट रहे है
उडी जहाज को पंछी पुनि जहाज पर आवे
गजब होगा गया
देखते ही देखते!
दीनू अन्तर्धान हो गया
देखते ही देखते!