कारगिल की घाटी/डॉ. विमला भण्डारी

डॉ. देवेन्द्र ‘इन्दे*श’


कारगिल की घाटी/डॉ. विमला भण्डारी /यात्रा संस्मरण/ प्रकाशक-आन लाइन गाथा/लखनऊ
कारगिल की घाटी ः देश भक्ति से ओत-प्रोत पे*रणास्पद किशोर उपन्यास
समीक्ष्य कृति ‘कारगिल की घाटी’ बाल साहित्यकार डॉ. विमला भण्डारी का देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रेरणास्पद किशोर उपन्यास (यात्रा संस्मरण) है, जिसमें लेखिका ने कारगिल युद्ध की विभीषिका में शहीद उन वीर जवानों की देश भक्ति को अपने उपन्यास का कथानक बनया है, जो हमारी किशोर पीढी को देश भक्ति की प्रेरणा देता है।
कथानक का प्रारम्भ लेखिका ने उदयपुर के एक विद्यालय में मस्ती करते, खाली पीरियड में गपिपाते छात्र-छात्राओं के बीच एक बालिका कारगिल युद्ध में शहीद उन जवानों की शहादत को नमन करते हुए, विद्यालय का स्वतंत्रता दिवस उस पवित्र भूमि कारगिल की घाटी में मनाने का संकल्प अपने साथियों को सुनाती है, और यहीं से लेखिका ने बडी कुशलता के साथ यात्रा संस्मरण में इस संकल्पित उद्देश्य को पिरो दिया है, जिससे बालक-बालिकाओं में स्वतंत्रता दिवस के माध्यम से शहीदों के प्रति सम्मान एवं देशभक्ति का भाव जागृत हो सके।
सम्पूर्ण कथानक कारगिल की यात्रा में आए प्राकृतिक, सुरम्य दृश्यों एवं ऐतिहासिक परिदृश्यों को एवं उनके महत्वों को रूबरू कराता है।
चूँकि लेखिका स्वयं एक इतिहास वेत्ता भी है, इसलिए ऐतिहासिक दृश्यों के वर्णन में उन्होंने रोचकता का विशेष ध्यान रखा है। बालक बालिकाओं की रुचि एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए सम्पूर्ण उपन्यास को सोलह अध्यायों में विभक्त किया गया है, जिससे बालकों को उपन्यास के हर यात्रा पडाव को समझने में सहुलियत हो।
लेखिका ने इस यात्रा संस्मरण में किशोरों की रुचि, मनोरंजन जिज्ञासा निराकरण एवं संस्कारजन्य भाव का भी समावेश हो इसका भी ध्यान रखा है।
बच्चों को रेल की यात्रा ना केवल रोमांचक लगती है, अपितु आनन्ददायक भी लगती है। लेखिका ने इस यात्रा में प्रत्येक बाल-यात्री को जोडे रखने का निरंतर प्रयास किया है। बच्चों को कहीं भी यह ना लगे कि यह यात्रा उनके लिए बोझिल तथा उबाऊ है। बाल लेखिका होने के कारण लेखिका ने बच्च की बाल सुलभ जिज्ञासाओं को अनेकानेक उदाहरण, लोकोक्तियों, मुहावरे तथा देशभक्ति की कविताओं के माध्यम से शांत करने का प्रयास किया है एवं ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक तथ्यों की जानकारी भी दी है।
बच्चे सफर में एक दूसरे से घुल मिल जाएँ, कोई एक दूसरे को पराया ना लगे, सब अपने से लगें, इसलिए लेखिका ने यात्रा के दौरान बच्चों का आपसी परिचय भी कराया है।
उपन्यास की भाषा में रवानगी परिलक्षित होती है। भाषा बच्चों की मानसिकता एवं उनकी बौद्धिक क्षमता के
अनुरूप है।
अनेक घाटियों को पार करती हुई यह रोमांचक यात्रा अपने पडाव की ओर निरंतर बिढती जा रही है। और पहुंच जाती है कारगिल के शहीदों की याद में बनाये गए स्मारक ‘प्रास’ पर। इस पवित्र स्मारक को देखकर इन बाल यात्रियों के मन में अपने वीरों के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत हो जाता है। उनके मन में देशभक्ति का भाव सचरित हो जाता है। लेखिका का उद्देश्य भी यही रहा है कि वह इस यात्रा संस्मरण के माध्यम से किशोरों के मन में अपने देश के प्रति एवं शहीदों के प्रति प्रेम एवं श्रद्धा का भाव जागृत कर सके, इसमें लेखिका पूर्ण रूप से सफल रही हैं।
उपन्यास का समापन, विद्यालय के समारोह में बालिका के यात्रा संस्मरण सुनाने से होता है।
डॉ. विमला भंडारी ने जिस उद्देश्य से यह किशोर उपन्यास यात्रा संस्मरण के रूप में लिखा हैं, उसमें वह पूर्ण रूप से सफल हुई हैं। कलेवर की दृष्टि से तथा किशोरवय के विद्यार्थियों को देशभक्ति के संस्कार जनित भाव से परिचित कराने में यह उपन्यास पूर्णतः सक्षम है। इस लघु उपन्यास को सेकण्डरी एवं सीनियर सेकेण्डरी के पाठ्यक्रम में भी समाविष्ट किया जा सकता है। यह किशोर उपन्यास ना केवल पठनीय है, अपितु संस्कारित करने के लिए भी उपयोगी है। यात्रा संस्मरण को जीवन्त बनाने हेतु दर्शनीय स्थानों के चित्र भी जगह-जगह दिये गए हैं। जिससे पुस्तक और अधिक उपयोगी हो गयी है। पुस्तक का मुख पृष्ठ सुन्दर, आकर्षक एवं पे*रणाप्रद है। ?
ए-३/४०३, वैशाली अपार्टमेंट, हिरणमगरी
सेक्टर-४, उदयपुर (राज.) ३१३००२