सात कविताएं

गोपीनाथ पारीक ‘गोपेश’


सात कविताएं
गायक गधा
आठ जुलाई को शादी थी
एक ऊँट की वन में
गायक गधा बुलाया सबके
खुशी हुई थी मन में
गाने लगा गधा ऊँट की
सुन्दरता का गाना
दुल्हा ऊँट खुशी हो बोला-
‘तेरा कंठ सुहाना’ ।। ?
गुड गोबर
बन्दर मामा की शादी में
आई गुड की भेली
बांट रही थी खुशी खुशी से
चुहिया एक नवेली
मरा हुआ गुड में से निकला
एक मकोडा काला
सभी दुखी हो कहने लागे-
‘गुड गोबर कर डाला’।। ?
तिल का ताड
गधेराम को किस ने पीटा
किसने पूंछ मरोडी
मिले उसे ही बूझ रही थी
सबको कानी घोडी
बिल्ली बोली- मैं क्या करती
वह मुझसे टकराया
घाव पड गये क्या, फिजूल में
‘तिल का ताड बनाया’।। ?
लाखों पाया
चरते चरते घास शेर ज्यों
आता दिया दिखाई
भगे जोर से हिरन सभी वे
अपनी जान बचाई
आज मिला भोजन फिर भी तो
नहीं पेट भर खाया
जान बच गई चलो हमारी
‘हमने लाखों पाया’।। ?
फीका पकवान
पहनी चुहिया ने वह साडी
जो नैहर से आई
झोला ले बाजार गई वह
लेने आज मिठाई
थोडा सा रसगुल्ला चखकर
आगे पाँव बढाया
ऊँची है दुकान परन्तु
फीका पकवान बनाया।। ?
टेढा आंगन
नाचे मोर पपीहा नाचे
नाचे चिडिया रानी
रिमझिम रिमझिम पानी बरसे
नाचे बतख सयानी
बगुला तो बस खडा रहा वह
एक टांग पर धुन में
बोला- ‘मैं कैसे नाचूँ तो’
टेढे इस आंगन में।। ?
टेढी खीर
जंगल के चूहों ने मिलकर
सभा एक बुलवाई
बिल्ली की करतूतों पर थी
सबको ही कठिनाई
इतने में बिल्ली को आते
देख बिखर गई भीड
चूहे बोले- ‘क्या उपाय अब
यह तो टेढी खीर’।। ?
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