आजादी के हाईकू

डॉ. बंशीधर तातेड


बीज क्रांति का
शहादत वीरों की
फल आ*ाादी।
जलियांवाला
नर-संहार बना
नीवे-आ*ाादी।
भूनते रहे
गोलियों से वो गोरे
मन के काले।
बंदूकें, तोपें
धराशाई, निढाल
इंकलाब से।
फांसी का फंदा
चूमा, गले लगाया
थर्रायी मौत।
जेल ही घर
खाने को डण्डे, मार
वो यातनाएं।
डरा, ना मरा
इतिहास है साक्षी
भगतसिंह।
आ*ाादी नहीं
एक शब्द, जुमला
पिंजरे से मुक्ति।
वरण किया
आ*ाादी के खातिर
फकत मौत।
सौ बार वारि
सुख, चैन, करार
आ*ाादी हेतु।
यूं ही ना मिली
आ*ाादी की सौगात
कीमत जानो।
अहिंसा पथ
लम्बा और विकट
जीता पथिक।
मां को गालियां
वतन से गद्दारी
कैसी आ*ाादी।
आकाई चालें
सेना पर पत्थर
बेमक्सदी जंग।
आतंकी बिल्ली
आ*ाादी रूपी छींका
तोडना चाहे।
दुश्मन कांपे
दुनियां माने लोहा
हिन्द जवान।
रहें ना रहें
हम, तुम और वो
रहे भारत। ?
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