क्या तुम ही हो

तेज राम शर्मा



क्या तुम ही हो
वह कौन है जो
तारों की झिलमिल लिए
समय के आकाश पर
चमकता रहता है
अविरल, प्रतिपल
क्या तुम ही हो?
वह कौन है जो
क्षण-क्षण छिजते संसार में
हीरे की चमक लिए अक्षुण्ण
पल-पल मिटते संसार को
चकमा दे जाता है
क्या तुम ही हो?
वह कौन है जो
जीवन में फैले
काले बादलों के किनारों पर
सूर्य किरणों की
चकमक किनारी बुन देता है
क्या तुम ही हो?
वह कौन है जो
जीवन के मरु से फैले
दाहक विस्तार में
खजूर घिरे शाद्वल के
शीतल जल से
सूखे कंठ को तर कर देता है
क्या तुम ही हो?
वह कौन है जो
अनन्त अंधकार और भयावत चुप्पियों से
खींच लाता है तारों की दिप-दिप,
सुरीला नाद
और मृत्यु को जीवन की लय से
गूँथ देता है
क्या तुम ही हो? ?
श्री राम कृष्ण भवन अनाडेल, शिमला (हि.मा.)-१७१००३
मो. ०९४१८५७३६११