चार कविता

डॉ. श्याम मनोहर व्यास


शब्द
शब्द
भावना व अनुभूति की
नाव पर
सवार होकर
अविरल यात्रा
करते हैं।
शब्द
ब्रह्म का स्वरूप है,
शब्द
भ्रम नहीं
वरन्
शाश्वत है।
शब्द
आत्मा का
गुण धर्म है।
शब्द
मौन है,
मुखर है।
शब्द
संवेदना है,
जीव से
अटूट सम्बन्ध है।
शब्द
सत्यं, शिवं, सुन्दरम् के
प्रतीक हैं।। ?
प्रकृति का गीत
पौ फटते ही,
प्रकृति ने शुरू किया
गीत लिखना-
शीर्षक रखा
‘ऊ षा’।
पूर्वांचल में उगा
‘सूर्य’।
प्रकृति ने उसकी किरणों में
तरंग को डूबो कर
लिखी कविता।
पहाडों पर, चट्टानों पर, घाटियों में,
भूमि पर, बागों में, पेडों पर
नदी की धारा पर
अभिव्यक्त हुई
खिलते फूल, पत्तियाँ
ओस की बूँदें
नदी की
कल-कल बहती धारा
चहचहाती चिडिया
आसमान पर उडता
विहंग वृन्द
ये सब हैं
गीत के बोल।
इन्हें आत्मसात कर
मानव मन होता है
प्रफुल्लित एवं आनंदमय
एक सुख की
अनुभूति।। ?
अहनाद
सृष्टि
ब्रह्माण्ड
तारे-सितारे
सूर्य-चन्द्र
ब्लैक हॉल
पल्सर
ग्रह-उपग्रह। धूमकेतु
आकाश गंगा। क्वासर
पंचतत्व हत्यादि
इनका सृजन
कैसे?
कौन सृजक
अनादि प्रश्न
कौंधता
जीव के मस्तिष्क में
विज्ञान कहता
महाविस्फोट का
परिणाम है
यह।
अनुभूति कहती। चिन्तन कहता
*ब्रह्म का
नाद है यह।
निराकर,
चैतन्यवान्
वही
अनादि
आत्मतत्व का
विराट रूप है
ईश्वर जो सत्य स्वरूप,
शाश्वत व चिरन्तन है।। ?
अधिकार का सच
ट्रेन के इस लोकल डिब्बे में
गन्दगी का ढेर है।
मूंगफली के छिलके
पान की पीक के चिह्न
इसके गवाह है।
एक दुबला-पतला
आठ वर्ष का
एक बालक
नौनिहाल देश का
झाडू से सारा कचरा
साफ करके
हाथ फैला कर
अपना
पारिश्रमिक
अधिकार के रूप में
माँग रहा है।
वह भिखारी
नहीं है।
बाल श्रमिक है
उपेक्षित सन्तान है
भारत माता की
देश की भावी
पीढी है।
यह समय का सच है,
अधिकार का सच है।। ?
१६, पंचवटी, उदयपुर-३१३००४ मो. ९३५२१०३१६२