तीन गीत

अतुल कनक


याद सताती है
याद सताती है.......
जैसे कोई तन्हाई में
आकर करे ठिठोली,
प्रेम करे, पर
हरदम बोले
गैरों जैसी बोली,
वैसे ही
ये हवा तुम्हारे
गीत सुनाती है.......
जैसे कोई
हौले से
छू दे तो सिहरन जागे,
जैसे कोई,
आहट सुनकर
सारा आंगन जागे,
जैसे कोई
भोर-रात भर
शगुन जगाती है.....
जीवन भर बहना है
तुमसे कुछ कहना है.....
बिखरे हैं
हर ओर सृष्टि में
ये जो सुख के रंग,
मन है कि
मैं कुछ क्षण जी लूँ
इन्हें तुम्हारे संग,
इसी साथ की
नदिया में
जीवन भर बहना है....
जब तक खुशबू
कसे हुए
चंदन का बाहुपाश,
तुम कह दो तो
गीतों से
भर दूँ सारा आकाश,
लिख दूँ-
नाम तुम्हारा
मेरे मन का गहना है.......
अगर करो स्वीकार.....
अगर करो स्वीकार....
जाने कैसी
बेचैनी है
पर थोडा सुख भी है,
मानो किसी
पहाडी झरने
में नदिया ठहरी है,
इसी नदी से
सीप बीनकर
मैं इक नाम लिखूँ
और तुम्हारे
उसी नाम को
तीरथधाम लिखूँ
लिख दूँ
नाम तुम्हारे
अपने सपनों का संसार.....
अगर करो
स्वीकार तो
मनचीता संबोधन दे दूँ,
सकुचाए से
अरमानों को
सुख का दामन दे दूँ
मेरी अंजुरि
में आशा का
अमृत है, तुम चख लो,
लाया हूँ
कुछ गीत चाह के
इन्हें लबों पर रख लो
कई युगों से
बाँच रहे हैं
सपने भी अभिसार...... ?
3-ए 3॰, महावीर नगर-विस्तार, कोटा-324॰॰9 (राज.)
मो. ॰94143॰8291