आठ कविताएँ

डॉ. राजीव गुप्ता


एक चिडिया
एक चिडिया
चोंच में तिनके दबाए,
नीड अपना डाल पर
फिर-फिर बनाए
है सृजन का सुख
उसे यह बहुत भारी
नव सृजन की कर रही
कोशिश वह प्यारी
इस तरह अस्तित्व को
अपने बचाये
एक चिडिया
चोंच में तिनके दबाए! ?
अस्तित्व
भगवान ने
इंसान को बनाया
और इंसान ने भगवान को
एक-दूसरे के बिना
किसी का अस्तित्व नहीं है! ?
बच्चे
उन्होंने कहा
कि बच्चे होते हैं
भगवान का रूप।
मैंने पूछा-
क्या सुअर के बच्चे भी?
सुन कर वह हो गये खामोश।
क्योंकि उनकी निगाहों में
सुअर के बच्चे, बच्चे नहीं थे। ?
युद्ध में
युद्ध में
तुम ने तलवार उठाई थी
और मैंने कलम
तुम युद्ध जीत भी चुके हो
परन्तु मुझे तो
अब सारी उम्र लडना है। ?
झलक
सभी
फैलाते हैं हाथ
किसी ना किसी के सामने
हाथ फैलाने वाले को
झिडक मत दो,
उसके चेहरे को
ध्यान से देखो
शायद उसमें कहीं
तुम्हारी ही झलक हो! ?
सच्चा संत
रास्ते से
उठाओ एक पत्थर
और पूछो उससे-
कि तुम कब से पडे हो यहाँ
तुम्हें किस-किस ने मारी हैं ठोकरें
तो वह कुछ भी नहीं बोलेगा
क्योंकि वह एक सच्चा संत है! ?
जिन्दगी
जबकि जिंदगी
एक आसान
सवाल की तरह
जीयी जा सकती थी
हमने बना लिया उसे
बेवजह ही कठिन
कोष्ठक पर कोष्ठक
लगाते चले गए
बंधनों के, सभ्यताओं के
वर्जनाओं के
अब एक-एक बंधन
को तोडने में हो रही है
सौ-सौ कठिनाइयाँ
कि देना पड रहा है हमें
कभी-कभी इसे
एक क्रांति का नाम। ?
प्यार के लिए
भगवान
प्यार नहीं करता
वह तो बस खुश होता है
या नाराज
श्राप देता है
या वरदान
प्यार करने के
लिए तो
उसे भी बनना
पडता है मनुष्य
लेना पडता है
जन्म इस पृथ्वी पर। ?
5/11, बाग कूँचा, फर्रुखाबाद (उ.प्र.)-2॰9625