तीन कविताएँ

निर्मल तेजस्वी


अनवरत युद्ध
मैं समझौता नहीं करूंगा
अंधकार के अधिष्ठाताओं से।
मैं अपनी क्षण-क्षण रीत रही सांसों से
आखिर दम तक प्रकाश और
जिन्दगी के गीत गाऊंगा
कंटकाकीर्ण पथ ने ही मेरे संकल्प को
जुझारू तेवर दिये हैं
मेरी जिन्दगी के तमाम दिन
युद्ध के लिये हैं।
युद्ध, अनवरत युद्ध लडता रहूंगा
तब तक
जब तक निर्णायक विजय नहीं हो जाती
प्रकाश की अन्धकार के खिलाफ
मैं लडता रहूंगा-लडता रहूंगा
और आखिर एक दिन
भाग्य के हाथों से
विजय छीन लाऊंगा
अपनी क्षण-क्षण रीत रही सांसों से
प्रकाश और जिन्दगी के गीत गाऊंगा। ?
रेखाचित्र
मेरी तमाम कविताएं
तेरे लिए तो है, मेरे दोस्त
यह तेरे ही दुख दर्द का कच्चा चिट्ठा है
तल्खियां या शीरीपन जो कुछ भी है
सब तुम्हारा है।
तुम्हारा ही जुझारू तेवर, मुझे रोशनी देता है
मेरे ख्यालों का तू ही प्रेरणा है
इसलिए, मैं अपनी तारीफ या निन्दा
पुरस्कार या प्रताडना से बेखबर हो
निरपेक्ष भाव से तेरी नाकामियों और
सफलताओं के गीत बो रहा हूं
वैसे सदियों से चल आ रहे इस किस्से
को आगे और बयान करना है।
अभी मात्र, रेखाएं, ही खींच पाया हूं
अभी प्राण भरना है। ?
फासला
सफ लता के सर्वोच्च, शिखरों पर पहुचने वाले लोग
कभी इसी बात से हतोत्साहित नहीं होते
कि वे आज जहां है
और जिस जगह उन्हें जाना है
उसके बीच कितना फासला है
फासले की चिंता में, निमग्न लोग
दौड से बाहर हो जाते हैं।
और हर पल रंग बदलती दुनिया की
अपार भीड में खो जाते हैं।
धुन के धनी कर्मशिल्पी तो अपनी सारी ताकत
अपने संकल्प को साकार बनाने में लगा देते हैं।
वे सिर्फ
चलते रहते हैं, चलते रहते हैं
और पराजय के भूत को
मन से भगा देते हैं।
उनके अर्न्तमन में
उपयोग में लिये जाने को आतुर
क्षमताओं का अथाह सागर
लहराता है
उनमें ऐसी बेचैनी होती है
जो कार्य सिद्धि और आत्म सम्मान पाने के लिए
हर पल आदमी को गतिमान करती है
और बाधा को परास्त करके
विजय वरती है। ?
5, समता नगर से.न.3, हिरण मगरी, उदयपुर-313॰॰1