साहित्यिक परिदृश्य




साहित्यिक परिदृश्य

साहित्यिक गोष्ठी
जोधपुर ः हिन्दी के शीर्षस्थ कथाकार, कवि डॉ. सत्यनारायण ने अपनी रचनाओं में आंचलिकता और जन जीवन की सहज, सरल एवं संघर्षमय अभिव्यक्ति की है। इस अभिव्यक्ति में व्यक्तिगत जीवन की सरल और संवेदनशील रस की फुहार बरसती है और व्यक्ति उसमें डूब जाता है। निजी जीवन की प्रेमिल अभिव्यक्ति पाठक को उस लोक में ले जाती है जिसे लोकोत्तर कहा जा सकता है। राजस्थानी शब्दावली युक्त उनकी रचनाएँ राजस्थानी लोक को इस तरह संप्रेषित करती है कि शब्द की अनुगूँज देर तक श्रोता के मन में रमी रहती है। अपने बचपन और युवावस्था के संघर्ष ने उनकी रचनाओं को चमकाया है। ये विचार अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद् द्वारा आयोजित डॉ. सत्यनारायण के एकल रचना पाठ और सम्मान समारोह में गांधी भवन में ख्यात राजस्थानी और हिन्दी के साहित्यकार डॉ. आईदानसिंह भाटी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि डॉ. सत्यनारायण न केवल राजस्थान के बल्कि देश के जाने माने गद्यकार और कवि हैं। आंचलिकता किसी भी रचनाकार का गुण होता है। आंचलिकता अपने अंचल की खुशबू सौंपती है। डॉ. सत्यनाराण ने स्नेह और प्रेमिल धागे पर कविता लिखी, उर्मी पर कविता लिखी। इस तरह जीवन के सारे संदर्भों के साथ कविता लिखी। आपकी कविता में पे*म की चमक और संवेदना है।
प्रस्तुतिः पद्मजा शर्मा जोधपुर
बीकानेर ः मुक्ति संस्था द्वारा मेरे आंगन में कार्यक्रम के तहत भारतीय भाषाओं का कविता-उत्सव के कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन में कहानीकार-व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि बीकानेर शहर की गरिमा में इस बात को भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि यहां न केवल राजस्थानी, हिन्दी और उर्दू वरन् अन्य भारतीय भाषाओं में भी लेखन हो रहा है। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी और राजस्थानी लोक संस्कृति के विद्वान भंवर पृथ्वीराज रत्नू ने स्मरण करवाया कि डिंगळ और राजस्थानी की समृद्ध परंपरा हमारे यहां रही है और भाषाओं की विविधता में कविता अपने भीतर नाद की जो झांकी, श्रवण से प्रकट करती है उसके लिए भाषा के बंधन नहीं होते। उन्होंने कार्यक्रम में पठित कविताओं पर हर्ष प्रकट करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि आज के कार्यक्रम में एक छोटा भारत अपनी विविधताओं को एकता के सूत्र में पिरोकर यहां प्रस्तुत किया गया है।
कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया ने कहा कि कोई कवि जिस किसी भी भाषा में लिखता हो उसे अपने परंपरा, लोक-साहित्य और समकालीन साहित्य से अच्छा खासा परिचय रखना चाहिए, अन्यथा वह कुछ रचते हुए भी कुछ नवीन अवदान नहीं दे सकता।
हिंदी कवि नवनीत पाण्डे ने ‘आसमान में घोंसला तो नहीं बना सकते’, ‘सोचो राजन सोचो’ एवं ‘बसंत’ गीत प्रस्तुत कर माहौल को कवितामय बना दिया।
उर्दू के शायर वली गौरी ने अपने अलग अंदाज में गजल के हर शेर पर दाद बटोरते अमन और भाईचारे का संदेश दिया। कवयित्री डॉ. मंजू कच्छावा ने पंजाबी में दो ग*ालों को तरन्नुम के साथ प्रस्तुत किया। सिंधी कवि साहित्यकार मोहन थानवी ने वर्तमान हालात पर संस्कारों और अपनेपन की बात की। थानवी की कविताओं में सिंधी संस्कृति की हवा का एक झौंका और आंगन में ऊर्जा देती जलती अगि* का दृश्य जैसे कविता में साकार हो उठा। बंगाली भाषा की कविता प्रस्तुत करते हुए कवयित्री सुश्री पूर्णिमा मित्रा ने एक दिन की झलक प्रस्तुत की वहीं अपने कुछ अनुभव भी श्रोताओं के बीच साझा किए।
हिंदी गीत के अंतर्गत वसंत के आगमन को अपनी सुरीली आवाज में कवयित्री डॉ. रेणु व्यास ने साझा किया तो राजस्थानी कवि गौरीशंकर प्रजापत ने जीवन और समाज के गूढ रिश्तों को कविता में रेखांकन करते हुए खुलासा किया। राजस्थानी और डिंगळ कविताओं के पाठ के अंतर्गत कवि जगदीश रत्नू, साहित्यकार मोईनुद्दीन काहरी, कवि कैलाश रतनू ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि सरदार अली परिहार, मुनीन्द्र अगि*होत्री, राहुल रंगा ‘राजस्थानी’, शंकरलाल व्यास, नदीम अहमद नदीम आदि अनेक श्रोता उपस्थित रहे। आभार कवि नाटककार हरीश बी. शर्मा ने प्रकट किया।
प्रस्तुतिः मोहन थानवी, बीकानेर
कोटा ः आर्य समाज के सभागार में साहित्य समिति भीममंडी के तत्वावधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन भगवत सिंह मयंक द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्ष्ता निर्मल पांडे ने की। मुख्य अतिथि अरविन्द सोरल, विशिष्ठ अतिथि इन्द्र बिहारी सक्सेना एवं प्रमिला आर्या थे। कार्यक्रम का संचालन रघुनंदन हटीला ने किया।
नाथद्वारा में सम्मानित किए गए के.आर. निर्मल एवं भगवत सिंह मयंक को पुष्पहार देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर रघुराज सिंह कर्मयोगी, भगवत सिंह मयंक, वेद प्रकाश परकाश, चंचल, रामेश्वर शर्मा, के.आर निर्मल, सुरेन्द्र सिंह गौड, साथी जहानवी, गौरी शंकर सोनगरा, ज्ञान गंभीर, भगवती प्रसाद गौतम,, राजेन्द्र आर्या, रामस्वरूप रसिया, पुखराज, अरविन्द सोरल, निर्मल पांडे, इन्द्रबिहारी सक्सेना, प्रमिला आर्या, रघुनंदन हटीला ने विभिन्न रसों में काव्य पाठ प्रस्तुत किया।
प्रस्तुतिः रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’
राजसमन्द ः राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी जयपुर एवं साहित्य मण्डल नाथद्वारा के तत्वावधान में साहित्यिक संस्थाएं श्री द्वारकेश राष्ट्रीय साहित्य परिषद्, साकेत साहित्य संस्थान, काव्य गोष्ठी मंच, श्रीनाथ साहित्य संगम एवं राजस्थान साहित्यकार परिषद की सामूहिक ब्रजभाषा काव्यगोष्ठी बसन्त मास में घने सघन तरूछायाच्छिद वृक्ष तले हजारी बाग कांकरोली में सम्पन्न हुई।
ब्रजभाषा काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता ब्रजकवि राधारमण सनाढ्य ने की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि फतहलाल गुर्जर ‘‘अनोखा’’ थे एवं विशिष्ट अतिथि श्यामप्रकाश देवपुरा प्रधानमंत्री साहित्य मण्डल थे।
इस अवसर पर नारायण सिंह राव, बाबूलाल सनाढ्य, छगनलाल प्रजापत, कमल अग्रवाल, केशव सांचीहर, शिरिष सनाढ्य, गिरिशचंद्र आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। आभार प्रमोद सनाढ्य प्रमोद ने व्यक्त किया।
प्रस्तुतिः नारायण सिंह राव
लोकार्पण
जयपुर ः स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान जयपुर द्वारा जयपुर में साहित्यकार नीलिमा टिक्कू की दो पुस्तकोंः- उपन्यास ‘‘कही-अनकही’’ एवं कहानी संग्रह ‘‘पगडण्डियाँ’’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि द्ववय वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुदगल (दिल्ली), कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. पवन सुराणा, पूर्व अध्यक्ष राज्य महिला आयोग एवं विशिष्ट अतिथि श्री नन्द भारद्वाज, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व निदेशक दूरदर्शन जयपुर द्वारा किया।
उपन्यास ‘‘कही-अनकही’’ एवं कहानी संग्रह ‘‘पगडण्डियाँ’’ की नीर-क्षीर समीक्षा डॉ. आशा शर्मा द्वारा की गयी।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष राजस्थान विश्वविद्यालय, डॉ. सुदेश बत्रा ने कहा कि नीलिमा टिक्कू के कहानी संग्रह पगडण्डियाँ की कहानियाँ लेखिका की संवेदनशीलता, कोमलता, आत्मीयता और निष्पक्षता से रची गयी मार्मिक कहानियाँ हैं जहाँ न कोई नायक है न ही नायिका अथवा षडयंत्र में लिपटे खलपात्र बस सभी अपने जटिल आयामों और सामाजिक संस्कारों और सोच से बँधे जीवित पात्र हैं। ‘‘मिट्टी की खुश्बू’’ में कश्मीर से विस्थापन का दर्द गहरे तक छूता है, दो पात्रों के माध्यम से दो पीढियों को रचा है। कश्मीर की परम्परा-आंचलिकता का सुन्दर चित्रण किया गया है।
नीलिमा का उपन्यास ‘कही-अनकही’ महिलाओं को सचेत करता उद्देश्यपरक, महत्वपूर्ण उपन्यास है। इसमें एक तरफ सशक्त महिला पात्र है जो जीवन मूल्यों के साथ जीना चाहती है, वहीं दूसरी ओर शॉटकट से प्रसिद्धि पाने को लालायित महिला का भी चित्रण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर पवन सुराणा ने कहा, नीलिमा का उपन्यास मैंने पढा तो मुझे लगा कि इसमें लकीर से हटकर स्त्री विमर्श के प्रति झकझोरा गया है कि इस तरफ भी देखो, पुरुष बुरे नहीं होते। उपन्यास में कई अच्छी बातें उठायी गईं है। इस अवसर पर साहित्य समर्था द्वारा आयोजित अखिल भारतीय डॉ. कुमुद टिक्कू कहानी एवं कविता प्रतियोगिता में देश भर से आये ४० साहित्यकारों को अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन स्पंदन सदस्य डॉ. आशा शर्मा, सुश्री रुबीखान, डॉ. रत्ना शर्मा द्वारा किया गया।
प्रस्तुतिः नीलिमा टिक्कू, जयपुर
उदयपुर ः साहित्यिक संस्था ‘युगधारा’ की मासिक सृजन विविधा गोष्ठी ‘बसन्त ऋतु’ के आगमन पर आयेाजित की गई।
इस अवसर पर आकाशवाणी उदयपुर के पूर्व वरिष्ठ उद्घोषक विष्णु भट्ट की बाल कहानियों को पुस्तक ‘सीख भरी बाल कहानियां’ का लोकार्पण जोधपुर के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं रंगकर्मी श्री श्याम सुन्दर ‘भारती’ द्वारा किया गया।
लोकार्पण से पूर्व संस्था के संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज ने श्री विष्णु भट्ट के साहित्यिक रचना कर्म पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्री भट्ट की अब तक सात बाल कहानियों की पुस्तकें और एक राजस्थानी भाषा में बाल कहानियों की पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि श्री विष्णु भट्ट बाल साहित्य पुरस्कार से अकादमी बीकानेर द्वारा पुरस्कृत हैं और आकाशवाणी के बाल कार्यक्रमों में भी बाल कहानियों का प्रसारण करते रहे हैं।
अध्यक्ष श्री लालदास पर्जन्य ने विविधा गोष्ठी के बारे में बताया कि युगधारा के २२ कवियों ने संयोग और वियोग के श्रृंगार के छंद, मुक्तक, दोहा, तेवरियों तथा ग*ालों से बसन्त ऋतु का स्वागत किया। कवि थे- हेमन्त मेनारिया, रेणु देवपुरा, डॉ. भीष्म चतुर्वेदी, डॉ. सेाहन वेष्णव, विजयलक्ष्मी देथा, डॉ. ज्योतिपुंज, जगदीश तिवारी, खुर्शीद नवाब, भवानी शंकर गौड, संस्था अध्यक्ष लालदास पर्जन्य, शिवदान सिंह जोलावत, श्रेणीदान चारण, श्याम सुन्दर भारती आदि।
प्रस्तुतिः विष्णु भट्ट
कोटा ः डॉ. अनीता वर्मा की पुस्तक ‘‘शचीन्द्र उपाध्याय के कथा साहित्य में संवेदना और शिल्प’’ समीक्षा ग्रंथ का लोकार्पण व साहित्यकार सम्मान समारोह रोटरी बिनानी सभागार में स्थापित रचनाकारों व साहित्यकारों के मध्य सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ओंकार नाथ चतुर्वेदी ने की। मुख्य अतिथि श्री रघुवीर सिंह मीणा (संभागीय आयुक्त) थे। विशिष्ट अतिथि डॉ. बी.एल.शर्मा प्राचार्य (राज. कला महा. कोटा) श्री दिनेश प्रकाश गोस्वामी (कार्यक्रम प्रमुख आकाशवाणी कोटा) एवं कंचना सक्सेना (विभागाध्यक्ष हिन्दी) थे। पत्र वाचन डॉ. विवेक मिश्र ने किया तथा कृति परिचय निर्मल पाण्डेय ने इस अवसर पर कृतिकार अनीता वर्मा ने कहा कि शचीन्द्र का कथा साहित्य माटी की गंध से युक्त है। इसमें हाडौती की गंध समाहित है। मानव अस्तित्व से जुडे प्रश्ा*ों का
उठाता है।
संचालन कथाकार विजय जोशी ने किया। तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कामिनी जोशी ने किया।
प्रस्तुतिः डॉ. विवेक मिश्र
भोपाल ः भोपाल की सुपरिचित गीतकार श्रीमती मधु शुक्ला के प्रथम गीत संग्रह का आज हिन्दी भवन के नरेश मेहता गोष्ठी कक्ष में संपन्न लोकार्पण समारोह में गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, वरिष्ठ कवि एवं कथाकार डॉ. सन्तोष चौबे, समालोचक संयुक्त रूप से डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र और म.प्र. साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. उमेशकुमार सिंह ने लोकार्पण किया।
इस अवसर पर इन वरिष्ठ साहित्यकारों ने लोकार्पित गीत संग्रह की भाव एवं शिल्पगत विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि इस गीत-संग्रह के गीत जीवन में काव्यरस घोलने वाले गीत हैं। इन गीतों में प्रकृति का आनंदप्रद चित्रण तो है ही, साथ ही मानवीय रिश्तों को भी गीतकार ने बहुत जतन से बखूबी उकेरा है।
डॉ. उमेशकुमार सिंह की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ गीतकार एवं ‘पहला अंतरा’ पत्रिका के संपादक नरेन्द्र दीपक ने किया। म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रसार समिति के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम के आयोजन में म.प्र. लेखिका संघ, पहला अंतरा पत्रिका और पहले पहल प्रकाशन ने भी भागीदारी की। गीतकार मधु शुक्ला ने गीत संग्रह में से चुनिन्दा गीतों का पाठ किया और अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में भी अवगत कराया।
प्रस्तुति ः कैलाशचन्द पंत, भोपाल
उदयपुर ः महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर द्वारा प्रतिवर्ष अन्तर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर दिये जाने वाले विभिन्न सम्मानों के तहत वर्ष २०१७ ई. का इतिहास लेखन के क्षेत्र में प्रदान किया जाने वाला ‘राज्य स्तरीय महाराण कुम्भा इतिहास सम्मान’ झालावाड के इतिहासकार ललित शर्मा को प्रदान किया गया।
इस अवसर पर ५ मार्च २०१७ को उदयपुर के राजसी सिटी पैलेस में आयोजित ३५वें वार्षिक सम्मान समारोह में फाउण्डेशन के प्रमुख न्यासी एवं निदेशक श्री जी अरविन्द सिंह मेवाड ने इतिहासकार ललित शर्मा को रजत तोरण, शाल, सम्मान पत्र एवं ५१ हजार रुपये की राशि का चैक प्रदान कर उनके (शर्मा के) द्वारा भारतीय राष्ट्रीय परिवेश में ऐतिहासिक अनुशीलन के क्षेत्र में जन चेतनार्थ शाश्वत सेवाओं के उपलक्ष में यह सम्मान किया गया।
ललित शर्मा ने अपने १२ शोध ग्रन्थ एवं १७०० से अधिक शोध आलेख अन्तर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर प्रकाशित करवाकर हाडौती एवं मालवा प्रदेश के इतिहास एवं पुरातत्व के विविध पक्षों पर शोधकार्य कर क्षेत्रीय स्थलों के माध्यम से अनेक मौलिक और अन्धकारपूर्ण पक्ष उद्घाटित किये जिनसे प्राचीन और मध्ययुगीन भारत (विशेषकर राजस्थान और मालवा) के इतिहास का एक बडा पक्ष प्रभावित हुआ है एवं उनके द्वारा लिखित शोध ग्रन्थों क्रमशः ‘राजर्षि संत पीपा जी’ एवं ‘जल दुर्ग गागरोन’ से राजस्थान और मालवा के इतिहास में एक नवीन इतिहास जुडा है।
प्रस्तुति- गायत्री शर्मा,झालावाड
सोजत सिटी ः युवा मण्डल संस्थान बारां के तत्वावधान में राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मेलन व सम्मानोपाधि कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। देश भर के अलग-अलग राज्य से आये करीब सौ साहित्यकारों ने अपनी भागीदारी निभाई। दो दिवसीय इस आयोजन में राजनीति और साहित्य एवं स्वांत सुखाय लोक हिताय पर पत्रवाचन व खूब चर्चा हुई। सम्मानोपाधि कार्यक्रम के तहत सोलह साहित्यकारों का सम्मान किया गया। मेहन्दी नगरी सोजत के ख्यातनाम साहित्यकार अब्दुल समद राही को उनके बहुआयामी सशक्त साहित्यिक अवदान के परिपेक्ष्य में श्री घनश्याम बंसल स्मृति सम्मान से गौरवान्वित किया गया।
उक्त सम्मान भव्य समारोह में मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के संसदीय सचिव व बारां विधायक श्री नरेन्द्र नागर अध्यक्ष श्री प्रेम नारायण गालव चेयरमेन वरिष्ठ नागरिक जन आयोग, जयपुर एवं विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही कोटा द्वारा प्रदान किया गया। हरि मोहन बंसल ने स्वागत एवं आभार की रस्म अदा की।
प्रस्तुति ः रिहाना ‘रानू’,सोजत सिटी
सम्मान
नाथद्वारा ः राजस्थान साहित्यकार परिषद् कांकरोली (राज.) द्वारा डॉ. एम.डी.कनेरिया स्नेहिल की अष्ठम काव्य कृति ‘अन्तस की पीडा’ का भव्य लोकार्पण एवं शिक्षा संस्कृति समाजसेवी साहित्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. भगवती लाल व्यास ने अपने उदगार प्रकट करते हुए कहा कि परिषद् के प्रयास सराहनीय है और कनेरिया द्वारा अल्प समय में आठ पुस्तकों का प्रकाशन करना परिषद् के लिए गौरव की
बात है।
अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् जयदेव गुर्जरगौड ने कहा कि कवि कथाकार को ज्यादा से ज्यादा लिख कर समाज में परिवर्तन लाने में योगदान देना चाहिए। कनेरिया की कृतियां सामाजिक परिवर्तन तथा युवकों को प्रेरणा देने वाली है। वे निरंतर इसी तरह लिखते रहें। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि कमर मेवाडी तथा जयपुर के हरिशंकर शर्मा ने आलेख वाचन कर कृति पर विशेष प्रकाश डाला।
विशिष्ठ अतिथि डॉ. जय प्रकाश पंडया ‘ज्योतिपुंज’ डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ डॉ. नवीन नंदनवाना ने भी समारोह को सम्बोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया साथ ही छात्रों द्वारा सरस्वती की वन्दना के साथ हुआ।
अतिथियों का स्वागत अभिभाषण संस्था के संरक्षक मधुसूदन पंण्ड्या ने किया डॉ. कनेरिया ने पुष्प वर्षा कर आगंतुक अतिथियों का अभिनन्दन किया तथा मंचासीन अतिथियों का सम्मान उपरना, पाग, प्रभु छवी, एवं प्रभु प्रसाद संस्था के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
सम्मानित हस्ताक्षरों का सम्मान मंचासिन अतिथियों द्वारा तिलक, उपरना, पाग, प्रभुछवि, प्रभु प्रसाद, शॉल एवं अभिनन्दन पत्र प्रदान कर नवाजा गया।
नन्दकिशौर निर्झर, चित्तौड-शिक्षा गौरव सम्मान, लालदास पर्जन्य, उदयपुर-कला एवं संस्कृति सेवा रत्न सम्मान, दलीचन्द्र जैन, आमेट-समाज सेवा रत्न सम्मान, दिनेश छाजेड, रावतभाटा-समाज सेवा रत्न सम्मान, रेखा लोढा, भीलवाडा-समाज सेवा रत्न सम्मान, नीता चौबिसा, बांसवाडा-समाज सेवा रत्न सम्मान, प्रमीला आर्य, कोटा-समाज सेवा रत्न सम्मान, धीरेन्द्र शर्मा, कांकरोली-समाज सेवा रत्न सम्मान, शरद बागोरा, नाथद्वारा-समाज सेवा रत्न सम्मान, ओम दैया बीकानेर-पत्रकारिता सेवा रत्न सम्मान।
कार्यक्रम में सभी क्षेत्रों के बडी संख्या में साहित्यकार बंधु एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थित में राज. साहित्कयार परिषद् के अध्यक्ष डॉ. नगेन्द्र मेहता के नेतृत्व में डॉ. कनेरिया का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम का संयोजन नीना शर्मा सह संयोजक ज्योत्सना पोखरना तथा आभार प्रदर्शन डॉ. माधव नागदा ने किया।
प्रस्तुति ः नीना शर्मा
भीलवाडा ः २ अप्रैल, २०१७ को नैतिक अभ्युद विचार मंच की ओर से आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में श्यामसुन्दर सुमन को कवि दादा भंडिया स्मृति सम्मान-२०१७ तथा डॉ. अवधेश कुमार जौहरी को विशिष्ट सम्मान संस्था के संरक्षक गणेश लाल कुकडा सुमन, अध्यक्ष डॉ. अशोक सोडाणी, मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी, प्रहलाद पारीक, विशिष्ट अतिथि फतहसिंह लोढा व संतोष कुमार लोहानी ने प्रशस्ति पत्र, शाल, साहित्यिक पुस्तकें व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
प्रस्तुति ः चिरंजी लाल, ‘देश प्रेमी’
नीमच ः मालवा माटी के ख्यात साहित्यकार बालकवि बैरागी को यह सम्मान पंजाब और हरियाणा राज्य के स्वामी रामानंद संस्था से जुडे सभी संगठन ने मिलकर दिया। २ अप्रैल, २०१७ को चंडीगढ में आयोजित सम्मान समारोह में बैरागी को ‘स्वामी रामानंद साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया।
सम्मान निधि के रूप में एक लाख ११ हजार १११ रुपये की राशि और सम्मान पट्टिका प्रदान की। इतनी कम अवधि में चौथे बडे सम्मान से सम्मानित होने वाले बैरागी संभवतः प्रदेश और देश के साहित्यकारों में एकमात्र हैं।
हरियाणा ः राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार रत्नकुमार सांभरिया को हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से १७ मार्च २०१७ को ‘‘हरियाणा गौरव सम्मान’’ से सम्मानित किया गया है। हरियाणा राज्य की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में अकादमी की ओर से पंचकूला के इन्द्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने यह सम्मान प्रदान किया। सम्मान स्वरूप श्री सांभरिया को एक लाख रुपये की राशि, शॉल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। तीन दिवसीय ‘हरियाणा साहित्य संगम’ के उद्घाटन सत्र के इस अवसर पर हरियाणा की सूचना एवं जनसंफ मंत्री श्रीमती कविता जैन, अकादमी की निदेशक डॉ. कुमुद बंसल सहित बडी संख्या में साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
सांभरिया की एकांकी, नाटक, कहानी, लघुकथा और आलोचना की ११ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी कहानियां और नाटक देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढाए जा रहे हैं और उनकी रचनाओं पर तीन दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं शोध कार्य कर रहे हैं। अमेरिका की कम्पनी हैशेट इण्डिया द्वारा सांभरिया की पन्द्रह अनूदित कहानियों का प्रकाशन ‘‘थंडरस्टोर्म’’ नाम से किया गया है। पुस्तक का विमोचन जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल-२०१६ में साहित्यकार उदय प्रकाश द्वारा किया गया था।
प्रस्तुति ः डॉ. राजेन्द्र बडगूजर, (हरियाणा)
जयपुर ः अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन सृजन गाथा डॉटकॉम की ओर से इंडोनेशिया (बाली) में आयोजित तेरहवें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन (दिनांक २-९ फरवरी २०१७) में डॉ. राधेश्याम भारतीय (साहित्यकार एवं स. महाप्रबंधक, सेल्स एंड मार्केटिंग बी.एस.एन.एल.) से.नि. को उनके हिंदी साहित्य में योगदान के लिए ‘सृजन सम्मान-२०१७ ठाकुर जगन्मोहन सिंह-२०१६’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी नवप्रकाशित पुस्तक ‘तुम ही नींव हो तुम्हीं कंगूरे’ का विमोचन हिंदी के प्रख्यात समीक्षक श्री खगेन्द्र ठाकुर व अन्य विद्वानों द्वारा किया गया। सम्मेलन के एक सत्र में आपने आलेख व कविता पाठ भी किया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. भारतीय की विविध विधाओं में आठ पुस्तकें प्रकाशित व पुरस्कृत हो चुकी हैं। आफ लेख व अन्य रचनायें राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित व पुरस्कृत होते रहते हैं।
प्रस्तुति ः राधेश्याम भारतीय, जयपुर
कानपुर ः भारतीय बाल कल्याण संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ५८वें सम्मान समारोह में आकोला, चित्तौडगढ, (राज.) के साहित्यकार राजकुमार जैन ‘राजन’ को ‘डॉ. राष्ट्रबन्धु स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बाल साहित्य सृजन, बाल कल्याण एवं बाल साहित्य उन्नयन के क्षेत्र में विश्व स्तरीय उल्लेखनीय कार्यों के लिए संस्थान ने श्री राजकुमार जैन ‘राजन’ को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र श्रीफल व नगद धन राशि भेंट कर सम्मानित किया। राजकुमार जैन ने सम्मान में प्राप्त इस राशि को अनाथ एवं बेसहारा बच्चों के सहयोगार्थ ‘सुभाष चिल्ड्रन सोसायटी’, नोबस्ता, कानपुर को दान कर दी है। ?
प्रस्तुति ः महेश मेनरिया, आकोला