पुस्तक ः खिलती कलियां ः हंसते फूल/बाल साहित्य/

रमेश ‘मयंक’



रमेश ‘मयंक’

पुस्तक ः खिलती कलियां ः हंसते फूल/बाल साहित्य/लेखक-अहमद हसन ‘अहमद’/प्रकाशक-रईसा प्रकाशन-
अजमेर/मूल्य-१६०/- रु./सन्-२०१६/पृ. १३६
पुस्तक ः रघु की चतुराई/लेखक-तरूण कुमार दाधीच/बाल कथा संग्रह/प्रकाशक-अनुपम प्रकाशन-उदयपुर/
मूल्य-६०/- रु./सन्-२०१५/पृ. ५०

खिलती कलियां ः हंसते फूल
‘खिलती कलियां, हंसते फूल’ बाल सााहत्य की अहमद हसन ‘अहमद’ की नवीनतमा कृति है। इसमें कविताएं, ग*ालें, दोहे, कहानी पर मुक्तक एवं कहानियां हैं। कविताओं का विषयवस्तु भ्रूण हत्या, नवजात गुडिया हमारा विद्यालय, नन्हें विद्यार्थी इत्यादि है। वे बाल विवाह शिक्षा में रोडा, डेरा फेरू में शिक्षा, जल, सडक, बिजली, मकान आदि बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों की बात करते हैं एवम् सामाजिक कुरीतियों-विकृतियों, अज्ञानता, निरक्षरता, अंधविश्वास, झाड-फूंक, डोरा-डांडा, जादू-टोना के विरूद्ध स्वर बुलंद भी
करते हैं।
उन्होंने ग*ालों में बच्चों के चरित्र निर्माण की बात कही है। उनकी ग*ालों में देश प्रेम उमडता है।
बात अब घोंसलों पे खत्म नहीं,
अब तो पूरे चमन की बात करें।
वतन पर मर मिटना जिससे आए,
हमें सबक वो जनाब देना।
कहानी जैसी करनी वैसी भरनी म ट्यूशन प्रवृत्ति पर करारा कटाक्ष किया गया है। शिक्षा जगत म प्रदूषण में छात्रों की उत्कृष्ट सोच को तर्क संगत व रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
वन्दना में कवि की कामना है-बोल मीठे, व्यंग्य तीखे देने की व लेखनी में धार देने की। भ्रूण हत्या में उठाया गया सवाल-बोलो कब तक चलेगा ऐसा, कोख में हत्याओं का धन्धा का विषय वस्तु बाल साहित्य का नहीं बडों का है। नवजात में-खुशियों का भंडार लुटाए, ये छोटी सी एक इकाई की भाषा में सरलता व भावों में गंभीरता है। दुनिया का हर गीत है फीका, मीठी बस लगती है लोरी, मैं हूं जैसे हो कैदी, मुझ पे सारी पाबंदी, आपा को सब प्यार करें, मुझ पर अत्याचार करें आदि की भाषा हिन्दी - उर्दू मिश्रित है। वाक्य विन्यास में सुन्दरता, अच्छा सोच, मार्मिक भाषा रेखांकित
योग्य है।
विद्यालय में पहला दिन, हमारा विद्यालय, नन्हें, विद्यार्थी, कम्प्यूटर पर बच्चे, उद्यान-भ्रमण, बाल काव्य इत्यादि कविताएं गेय, तुकान्त, सरस प्रवास व सरल भाषा के कारण बालकों को प्रिय लगती हैं।
हर इक बच्चे को भाती है,
छुई-मुई सी नन्हीं कविता।
ज्ञान-दीप से ज्योति जगाएंद्व,
तमको रोशन करती कविता।
इनके अतिरिक्त खेलकूद व पौधों पर कविताएं भी रोचक व पे*रक हैं। घटते जंगल, बढती विपदा में चिन्ता दर्शाई गई है। नक्षत्र और धरती में फौवारे तुक सहज नहीं प्रतीत होती है। स्वतंत्रता सेनानियों की जेल में राष्ट्र प्रेम का भाव मिलता है-
जेल की ये दीवारें है, इतिहास भरा भण्डार,
इनम गांधी, नेहरू तयियब बोस की है ललकार।
दोहों में सावन और मल्हार विषयक सामग्री में वैविध्य दृष्टिगत है-
करता हूं मलहार से, वर्षा का आह्वान,
सुर दे मुझको शारदे, वीणा का दे ज्ञान।
मेंरी विनम्र सम्मति में पुस्तक की कविताएं रोचक व कहानियां प्रेरक हैं। जहां बाल साहित्य है वहां भाषा सरल व प्रवाह पूर्ण है एवम् उर्द लहजा, तन्मयता प्रभावित
करती है।
आशा है यह पुस्तक पाठकों को पसंद आयेगी। कृति उद्देश्य आधारित व सार्थक कृति है। लेखक-प्रकाशक सभी बधाई के पात्र हैं।
संस्कारों का प्रेरक बालकथा संग्रह-रघु की चतुराई
हिन्दी-बाल साहित्य को जिन रचनाकारों ने समृद्ध किया है उनमें श्री तरूण कुमार दाधीच का उल्लेखनीय स्थान है। पांच बाल कथा संग्रह-सच्ची मित्रता, मयंक की दोस्ती, अच्छाई-बुराई, अनूठी जीत एवं बाल कविता संग्रह-दिन की कविता, मंकू की कहानी, बाल फिल्म पटकथा-कल इनका है के रूप में प्रदेय रेखांकित योग्य है। श्री दाधीच का बला कथा संग्रह-‘रघु की चतुराई’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है जिसमें ग्यारह बाल कहानियां हैं। ये कहानियां-बच्चों की रूचि को विकसित एवं परिष्कृत करने, उन्हें पढने के लिए प्रेरित करने, सर्वांगीण विकास करने, नैतिक मूल्य विकसित करने तथा सरल जीवन, साहस, प्रेम, दया, कर्तव्य बोध जागृत करने में समर्थ हैं।
राकेश की दोस्ती, माँ की ममता, जागरण, खजाने की आय, सच्ची मित्रता, रघु की चतुराई, भूल का अहसास, अच्छाई-बुराई, सुधर गया मोनू, समय का चित्र-शीर्षक से प्रकाशित बाल कहानियां-बालकों को आत्मविश्वास, साहस, स्वावलंबन आदि गुणों से सम्पन्न बनाती है, उनका बौद्धिक विकास करती है, वातावरण से समायोजन करना सीखाती है एवं संकीर्ण भावनाओं से मुक्त कर मानसिक कुंठाओं को शिकार होने से बचाती है।
राकेश की दोस्ती में धनवान माता-पिता का बेटा राकेश एन.सी.सी. के उदयपुर ट्यूर पर जाने के लिए मिली राशि को गणेश के पैर के ऑपरेशन के लिए सौंपता है। ऐसी दोस्ती की महानता व मानवता को वन्दन है। माँ की ममता कहानी बताती है कि ‘माँ आखिर माँ होती है।’ माँ की ममता महान है। सौतेलापन ममता म बाधक नहीं बनता है। जागरण कहानी दर्शाती है कि-बच्चे युवक रीढ होते हैं, नवयुवक संगठित होकर लुटेरों का सामना कर सकते हैं। यदि आत्म सम्मान ओर स्वाभिमान जगाया जाए तो जागरण के पश्चात् कोई भी लुटेरा लूट नहीं सकता।
खजाने की आय कहानी की सीख है कि भ्रष्ट, बेईमान और चापलूस लोगों को हटाकर ईमानदार व्यक्तियेां को राज्य का कार्यभार सौंपा जाए तो आय बढ सकती है। बर्फ के टुकडे के माध्यम से सरल शब्दों में प्रभावी सन्देश दिया गया है। सच्ची मित्रता कहानी में मित्र की सहायता करने के कारण गोपाल की पढाई जारी रहती है वह रात्रि में गाँव के निरक्षरों को साक्षर करने का कार्य करता है। आवश्यकता इस बात की है कि पढाई जारी रखने के लिए, अपने सपने पूरे करने के लिए कोई मित्रवत् सहायता के लिए आगे आकर सम्बल प्रदान करे।
रघु की चतराई में रघु के बुद्धि-चातुर्य से माता-पिता को सही रास्ता मिल जाता है और बुढापे के कारण वे बूढे बाबा का अपमान करना बंद कर देते हैं। भूल का अहसास के कथ्य का आधार है कि-सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते। अच्छाई-बुराई सीखाती है घर म चोरी करने की आदत बुरी है। दिनकर का सपना दृढ निश्चय, अटूट लगन और समर्पित भावना से साकार होता है। समय का चित्र में समय अपने पंखों के साथ उडता है वह कभी ठहरता नहीं से परिचय है।
इस प्रकार मेरी विनम्र सम्मति में बच्चों म अच्छे संस्कारों की प्रेरणा प्रदान करने वाली ये कहानियां-उद्देश्य निष्ठ हैं सार्थक हैं तथा बालकों में रचनात्मक, सकारात्मक सोच के साथ जीवन मूल्यों का समुचित विकास करने म समर्थ है। ?
बी-८, मीरा नगर, चित्तौडगढ (राज.) ३१२००१
मो. ०९४६११८८२५४