बाल जगत

राजकुमार सचान


चाचा
गली-गली जब भटके चाचा
किसी-किसी को खटके चाचा
पता नहीं वो कौन चीज है
जिस पर आकर अटके चाचा
खोये-खोये दिखते चाचा
मोबाइल पर लिखते चाचा
छत पर जा-जा बातें करते
घर पर कभी न टिकते चाचा
‘मिस’ को ‘मैम’ बताते चाचा
मैसॅज सभी मिटाते चाचा
तीन विषय में फेल हुए हैं
सबसे रहे छिपाते चाचा
दीवानों में आगे चाचा
इधर-उधर को भागे चाचा
इंतजार में मिस्ड काल की
रात-रात भर जागे चाचा
दिल के बडे निराले चाचा
रहे न भोले-भाले चाचा
मम्मी हँस-हँस के बतलायें
चाची लाने वाले चाचा

मेरा वतन
है मेरा प्यारा वतन, है मेरा प्यारा वतन।
हिन्दू भी, मुसलमाँ भी, सिख भी करते हैं नमन।।
चाँदी का मुकुट हिमगिरि, उत्तर में चमकता है
अमरित सा पानी यहाँ, नदियों में मचलता है
दूर दक्षिण में समंदर, धोता है जिसके चरन।
है मेरा प्यारा वतन.........।।
लौट के जा नहि पाया था सिकंदर महान भी
टूटी थी इस जमीं पे, गजनबी की शान भी
किया था मराठों ने यहीं, अँग्रेजों का दमन।
है मेरा प्यारा वतन.........।।
है गीता का संदेशा, रहे सच्चाई अमर
डुबा पाई न थी प्रहलाद को सागर की लहर
नाश रावन का कराने को, हुआ सीता का हरन।
है मेरा प्यारा वतन.........।।
गाँधी नेहरू की जमीं, असफाक की धरती है
भगत सुभाष के बलिदानों को नमन करती है
हर जवाँ देश की खातिर, यहाँ बाँधे है कफन।
है मेरा प्यारा वतन.........।।
यहाँ पर मंदिर का मस्जिद से मिलन होता है
कहीं इकबाल कहीं मीरा का भजन होता है
कर्मवती को हुमायूँ ने, यहीं माना था बहन।
है मेरा प्यारा वतन.........।। ?

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