शुभ-समाचार

ज्ञान प्रकाश ‘पीयूष’


विनीता ने अपने मुख पर किंचित मुस्कान बिखेरते हुए अपनी माँ से आत्मीयता प्रकट करते हुए कहा, ‘‘माँ आप मेरी शादी को लेकर चिंतित हो ना? अब चिंता की कोई बात नहीं। थोडा मुस्कराओ ना प्लीज! आप मुस्कराओगी तभी मैं आपको एक शुभ समाचार सुनाऊँगी।’’
शुभ-समाचार की बात सुन कर माँ के चिंतित व उदास चेहरे पर तनिक सी मुस्कान आई। कृत्रिम आँखें तरेरते हुए माँ बोली, ‘‘बहुत समझदार हो गई हो, तुझे कैसे पता मैं तेरी शादी को लेकर चिंतित हूँ। हाँ, जरा बता क्या शुभ समाचार है? मैं भी तो सुनूँ।’’
विनीता थोडा लजाते हुए बोली, ‘‘माँ आफ होने वाले दामाद परेश जी का फोन आया था, उनकी छुट्टी मंजूर हो गई है, शादी अगले हफ्ते ही निर्धारित तिथि पर होगी, कह रहे थे।’’ उनकी माँ ने कहा था, ‘‘परेश बेटे, तेरे पिता और विनीता के पिता दोनों देश की सरहदों की रक्षा करते हुए शहीद हो गये थे। आदमी का साया सिर से उठ जाने पर औरत पर क्या बीतती है, मैं अच्छी तरह जानती हूँ, मैंने यह सब भोगा है। विनीता की माँ के दुःख दर्द को मैं समझती हूँ। वह अकेली इतने कम समय में शादी का प्रबंध कैसे करेगी? ऊपर से नोट बंदी के कारण हालात और भी खराब बने हुए हैं, बैंक में लम्बी-लम्बी कतारें लगी हुई हैं, आवश्यकता के मुताबिक रुपये भी पूरे नहीं निकल पा रहे हैं, लिमिटेशन लगी हुई है। मैं विनीता की माँ से फोन पर बात करूँगी। घबराने की कोई बात नहीं है, शादी निर्धारित तिथि पर ही होगी और लिमिट के अनुसार बैंक से जितने-रुपयों का आसानी से प्रबंध होगा, उसी में सिंपल तरीके से टी-पार्टी करके बिना बाह्याडम्बर के शादी होगी; यही समय की माँग है। खुशियों का संबंध दिल से है, दिखावे में क्या रखा है? घर के पाँच-सात सदस्य जाएँगे और विधिविधान से फेरे की रस्म अदा करके हँसी-खुशी से बहू को मान-सम्मान पूर्वक घर ले आएँगे।’’
बेटे को माँ की सलाह पसंद आई। उसने बिना एक मिनट की देरी किए, विनीता को फोन लगाया और माँ के फैसले से अवगत करवा दिया।
बेटी के मुख से सचमुच शुभ समाचार सुनकर माँ के चेहरे से चिंता की रेखाएँ काफूर हो गई और चेहरा ताजा फूल की तरह खिल उठा। पास में बैठी दादी-माँ ने पोती-बहू के बीच हुए संवाद को, शुभ समाचार को सुन लिया था, उसकी बूढी आँखों में आशा और खुशी की अपूर्व चमक थी।
महत्त्व रक्तदान का
फोन की घंटी बहुत देर से बज रही थी, हार कर माँ ने ही फोन उठाया। हैलो! कौन?
मैं सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से सिस्टर सलमा बोल रही हूँ। देखो, घबराने की कोई बात नहीं हैं, परेश दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, उसके मोबाइल से यह घर का नम्बर प्राप्त हुआ है, शीघ्र अस्पताल पहुँचिए। ‘‘अस्पताल!’’ माँ के मुँह से चीख निकली और घबराहट में हाथ से फोन छूट गया। पास वाले रूप में स्टडी कर रही विभा ने माँ के मुँह से निकले अस्पताल शब्द को सुना तो दौड कर माँ के पास आई, वस्तु स्थिति से अवगत होने पर आनन-फानन में वे तुरंत अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुँचे।
‘‘डॉक्टर साहब क्या हुआ परेश भैया को?’’ विभा ने डॉक्टर से पूछा। ‘‘यह अभी बताने का वक्त नहीं। ए-ग्रुप का ब्लड तुरंत चाहिए, शीघ्र उपलब्ध करवाइए, अस्पताल के ब्लड बैंक में फिलहाल उपलब्ध नहीं है।’’ ‘‘ठीक है डॉक्टर साहब।’’ कह कर विभा ने अपने मोबाइल में नम्बर देखकर ए-ग्रुप की अपने कॉलेज की दो घनिष्ठ सहेलियों को फोन से तुरंत सरकारी-अस्पताल पहुँचने को कहा। ३५ मिनट के अन्दर-अन्दर ब्लड का इंतजाम हो गया। रक्तदान करके दोनों सहेलियों ने सबसे पहले विभा की माँ के चरण-स्पर्श किए और सांन्त्वना देते हुए कहा, ‘‘माताजी, अब घबराने की आवश्यकता नहीं है। हमने रक्तदान कर दिया है और मुस्कराते हुए कहा, ‘‘रक्तदान महादान।’’
माँ ने कृतज्ञ नेत्रों से विभा की सहेलियों को नीचे से ऊपर तक गौर से देखा; उनका चेहरा आनंद से पुलकित था, शरीर में कमजोरी के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। माँ ने उनसे पूछा, ‘‘बेटे। रक्तदान करने से क्या शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती; ये सब मेरे मन का वहम है क्या?’’
‘‘हाँ, माताजी! रक्तदान करने से सचमुच कोई कमजोरी नहीं आती, और २४ घंटे में ही रक्त की आपूर्ति हो जाती है।’’
सुनकर माँ की आँखों में हर्ष के आँसू छलछला आए, परन्तु उन्हें अपनी पुरानी सुनी सुनाई दकियानूसी सोच पर कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है बहुत पश्चाताप होने लगा और आज की पढी लिखी सुक्षिक्षित नई पीढी की वैज्ञानिक सोच पर गर्व की अनुभूति भी होने लगी तथा उन्हें अपने पर उस बात को स्मरण करके क्रोध भी बहुत आ रहा था, जब तीन माह पूर्व उसकी बेटी विभा रक्तदान करके कॉलेज से घर विलंब से पहुँची थी, तब उसने उसे बहुत डटा था पर आज उसकी आँखें-खुल चुकी हैं, उसे रक्तदान के महत्त्व का पता चल चुका है।
कन्या का सम्मान
आज कजरी का विरोध किसी ने भी नहीं किया, अपितु उसे सम्मान की दृष्टि से देखते हुए, उसके हाथ से बाँटे जा रहे कन्या जन्म की बधाई के लड्डुओं को खुशी-खुशी से सबने स्वीकार किया। लडके के जन्म की भाँति ही थाली बजाई गई, दीप जलाए गए, रंगीन गुब्बारे उडाए गये और ढेरों खुशियाँ मनाई गई।
यह सब देख कर दादाजी के नेत्र खुशी से छलछला आए, वे कजरी से बोले, ‘‘बेटी! यह तेरे द्वारा साल-भर से चलाए जा रहे ‘‘जागरूकता अभियान-कन्या को भी मिले पूरा सम्मान’’ की प्रेरणा का सुपरिणाम है। आज लोगों में जागरुकता आने लगी है, वे कन्या के महत्त्व को समझने लगे हैं, घर-परिवारों में अच्छाई की ओर कदम बढाने और बुराई का विरोध करने का साहस निर्मित होने लगा है। बेटी! इस सबका श्रेय तुझे ही जाता है।’’
दादाजी द्वारा अपनी प्रशंसा सुनकर कजरी भावविभोर हो गई, उसने तुरंत आगे बढकर दादाजी के चरण-स्पर्श किए और कहा, ‘‘नहीं, दादाजी! यह तो आफ आशीर्वाद का प्रताप है, आप अगर मेरे साथ खडे नहीं होते, मेरी हिम्मत नहीं बढाते तो मैं अकेली इस अभियान में सफल कैसे हो पाती?’’
दादाजी बोले, उससे पूर्व पास खडी गीतों ने कहा, ‘‘अपनी इस अशिक्षित कच्ची बस्ती में जागरूकता अभियान से पूर्व कन्या के जन्म को अशुभ माना जाता था, छुप-छुप कर भ्रूण हत्याएँ करवाई जाती थी, बस्ती के एकान्त मोड पर कचरे के ढेर में जब-तब कन्या-भू*ण को कुत्तों के द्वारा नोचते देखा जाता था, मगर अब कजरी के प्रयास रंग लाने लगे हैं, वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। मनीषियों ने ठीक ही कहा है, यदि युवा किसी कार्य को सच्चे दिल से करने की ठान ले, तो सफलता निश्चित रूप से उसके चरण चूमती है।’’
दादाजी ने गीता की बात का समर्थन किया, और सहमति में अपना सिर हिलाया।
एन.एस.एस. कैम्प ः स्वच्छता अभियान
कॉलेज प्राचार्य द्वारा बुलाए जाने पर एन.एस.एस. प्रभारी मिसेज मान प्रिंसिपल-कक्ष में पहुंची।
‘‘हॉ, मिसेज मान। ‘‘तनिक गम्भीर मुद्रा बनाते हुए प्रिंसिपल सर बोले, ‘‘आपको याद होगा, स्टॉफ मीटिंग में सर्व सम्मति से तय हुआ था कि अबकी बार एन.एस.एस.कैम्प, मंडी की सबसे पिछडी और गंदी धक्का बस्ती में लगाया जाएगा, क्योंकि अस्वच्छता के कारण मंडी में मलेरिया आदि रोगों की शुरुआत सबसे पहले वहीं से होती है। वहाँ स्वच्छता अभियान चलाना है और सौन्दर्यकरण हेतु पौधा-रोपण करवाना है।’’
मिसेज मान ने समर्थन की मुद्रा में कहा, ‘‘हाँ सर! तैयारी पूर्ण हो चुकी है। लक्ष्मीबाई ग्रुप की प्रभारी कुमारी प्रभा के नेतृत्व में शिविर की समस्त छात्राओं को कैम्प के उद्देश्य एवं कार्यों के बारे में अच्छी तरह समझा दिया है। कल शिविर की समस्त छात्राएँ झाडू, बाल्टी, टोकरी, खुरपी, कस्सी और नाली-साफ करने से संबंधित समस्त सामान लेकर शिविर स्थल पर पहुँच जाएँगी, एवं स्वच्छता तथा पौधा रोपण से सम्बन्धी समस्त कार्य शुभारंभ कर देंगी, आप बिल्कुल निश्चिंत रहें।’’
एन.एस.एस. प्रभारी मिसेज मान के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान से संबंधित कार्य तीव्र गति से चल रहे थे। आज शिविर का चौथा दिन था, कार्योंउ प्रगति पर था, मिसेज मान प्रतिदिन करवाए जा रहे कार्यो की प्रगति रिपोर्ट से प्रिंसिपल सर को हर रोज अवगत करवाती रहती थी। वे कार्यों से संतुष्ट थे।
बस्ती निवासी भी बहुत प्रसन्न थे, उनकी बस्ती का तो कायाकल्प ही हो गया था। बस्ती में अब कहीं भी गड्ढे, इक्कट्टा पानी एवं गंदगी के ढेर दिखाई नहीं दे रहे थे। गुरुदारे के आस-पास का परिसर एवं पूरी बस्ती शीशे की तरह स्वच्छ एवं चमचमाती दिखाई दे रही थी। ६० फुटी रोड के किनारे-किनारे नीम, शीशम और अशोक के पौधे लगे हुए थे और पार्क में ताजा हरी-भरी दूब एवं रंग-बिरंगे फूलों के पौधे मुस्कराते नजर आ रहे थे।
शिविर का आज पाँचवां और अंतिम दिन था। अचानक निरीक्षण पर आये प्रिंसिपल सर ने स्वयं अपनी आँखों से उन नयनाभिराम दृश्यों को देखा, देखकर बहुत अभिभूत हुए। उसी समय बस्ती के मैम्बर ने आकर प्रिंसिपल सर को अभिवादन किया और निवेदन किया, ‘‘सर। आफ कॉलेज की छात्राएँ बडी मेहनती हैं, उन्होंने तो हमारी बस्ती का नक्शा ही बदल दिया, इनके उत्कृष्ट कार्यों से सभी प्रसन्न हैं। बस्ती वासी चाहते हैं कि अगले वर्ष भी एन.एस.एस. कैम्प हमारी बस्ती में ही लगाया जाए।’’
मैंबर का निवेदन सुनकर प्रिंसिपल सर का सिर गर्व से ऊँचा हो गया, उन्हें अपने कॉलेज की छात्राओं और युवाशक्ति की कर्मठता पर फक्र महसूस हो रहा था तथा देश का भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा था। ?
१/२५८, मस्जिद वाली गली, तेलियां वाला मोहल्ला, सिरसा (हरि.)
मो. ९४१४५-३७९०२