पहले खबर क्यों नहीं की?

ऋषि मोहन श्रीवास्तव


पहले खबर क्यों नहीं की?
कैलाश नारायण बाथरूम जाते वक्त फिसल गए थे तभी से उनकी कमर में बहुत दर्द हो गया था। घर में जो देशी-इलाज हो सकता था। वह कैलाश नारायण कर चुके थे। पर दर्द ठीक नहीं हो रहा था।
पिछले कई दिनों से कैलाश नारायण जी अपने बेटे कमल से कह रहे थे- ‘‘बेटे पता नहीं क्या हो गया है? मेरी कमर का दर्द नहीं जा रहा है। थोडा समय निकाल कर मुझे किसी डाक्टर को दिखला दो। बहुत तकलीफ हो रही है।’’
-‘‘हाँ पिताजी, कल जरूर चलूंगा आपको डाक्टर के पास लेकर। आप चिन्ता न कीजिए। सब कुछ ठीक हो जाएगा।’’ -कमल ने बडी बे-फिक्री से जवाब दिया।
-लेकिन कमल का कल कभी नहीं आया। उसके पिता कैलाश नारायण दर्द सहते रहे। दिन और सप्ताह निकलते गए। पर कमल अपने पिताजी को डॉक्टर के पास नहीं ले गया।
ऐसे ही एक दिन अचानक से कैलाश नारायण की बेटी मधु अपने पिता के हाल-चाल जानने आ पहुँची। उसकी ससुराल भी झांसी में ही थी। जैसे ही मधु ने कैलाश नारायण को देखा। वह परेशान हो उठी- ‘‘पिताजी, आपने मुझे खबर क्यों नहीं की। एक मोबाइल ही कर दिया होता। आप इतने दिनों से दर्द सह रहे हैं।’’
-‘‘क्या करूँ बिटिया। मैंने कमल नारायण से कहा था कि- बेटा मुझे किसी डॉक्टर को दिखला दो। पर क्या करूँ। उसके पास मेरे लिए अब समय ही नहीं बचा।’’ - अपनी विवशता प्रकट करते हुए कैलाश नारायण बोल पडे। ‘‘कोई बात नहीं पिताजी, भईया के पास आफ लिए समय नहीं पर आपकी बिटिया के पास तो आफ लिए पर्याप्त समय है। चलिए मैं आपको अभी डॉक्टर के पास ले चलती हूं।’’
-मधु ने मोहल्ले के एक बालक दीपक से कहा- ‘‘दीपक, जरा जल्दी से एक ऑटो किराए से ला दो। डॉक्टर बंसल के अस्पताल तक जाना है।’’
दीपक फौरन एक ऑटो वाले को ले आया। मधु अपने पिता को लेकर डॉ. बंसल के हॉस्पीटल लेकर आई। यहाँ पर कमर का एक्स-रे किया गया। कमर में हड्डी खिसक गई थी। जिस कारण दर्द हो रहा था।
डॉक्टर ने कैलाश नारायण के लिए कमर में बेल्ट बांधने के लिए लिखा। एक क्रीम लगाने के साथ कुछ गोलियां भी खाने को दीं। मधु पिता को घर पहुंचाकर अपनी ससुराल लौट चुकी थी। उसे संतोष था- अब पिताजी दर्द से मुक्त
हो सकेंगे।
-इधर कैलाश नारायण सोच रहे थे- काश उन्होंने बिटिया मधु को पहले ही खबर क्यों न कर दी। वे एक महीने से कमर-दर्द क्यों सहन कर रहे थे। आज से ही उनका दर्द कम हो गया था। ?
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