सोलह हाइकू

सत्यनारायण ‘सत्य’


(१)
नश्तर से ये
चुभते हैं मीत,
तेरे ये शब्द!
(२)
सच को सच
कहना सीख लो,
काम आयेगा
(३)
उडना छोड,
धरती पे रहना
सीख लो रे!
(४)
आकाश नापो,
पाताल को फोड दो,
सत्य अटल
(५)
गुनगुनाना,
गीत गाना आया यूं,
तुम्हारे साथ।
(६)
रोज रोते थे,
आज हँसते हैं वे,
ईश्क के मारे
(७)
सरजमीं से,
जी मत चुराना जी,
मर जाओगे
(८)
सत्रहवाँ ये
साल आ गया जब,
सपने जवाँ
(९)
सत्य जान लो,
उसको पहचान,
लो मेरे मीत
(१०)
हर दम यूं
नाराज हो जाना,
ठीक तो नहीं
(११)
लो मुस्कुराना,
आ गया जब से यूं,
सारे गिले ना
(१२)
एक तूम जो
मिले, सारी दुनिया
मिल गई है
(१३)
तेरे नाम से
पहचाने जायेंगे,
यही भाव है
(१४)
यार, यारी से,
इस होशियारी से,
मैं मर गया
(१५)
सनम तुमने,
जिला कर मारा है,
बेमौत हमें
(१६)
तेरी आँखो के,
सिवा दुनिया में यूं
रखा क्या है?
(१७)
छोड देना तूं,
मुझको मँझधार,
तेरे भरोसे।। ?
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