सत्रह हाइकू

माता प्रसाद शुक्ल



सत्रह हाइकू
(१)
नाम अशोक
क्यों करता है शोक
विकार रोक।
(२)
खून की होली
मारे गए निर्दोष
धर्म लजाए।
(३)
सफाई करो
आस-पडौस की भी
स्वस्थ रहोगे।
(४)
उनको तुम
भूलो नहीं जिसका
एहसान है।
(५)
आजादी मिली
शिखर पर चढे
चरित्र खोया।
(६)
गाँव गरीब
शहर- में कुबेर
मचा अंधेर।
(७)
नशा करोगे
कैंसर हो जाएगा
बच्चे अनाथ।
(८)
निराश न हो
सफलता मिलेगी
कर्म करना।
(९)
घटा छाई है
बरसे ना बदरा
शजर लगा।
(१०)
नाम अनेक
ईश्वर है एक
लडते हैं क्यों?
(११)
स्वयं को हम
पथिक ही समझें
चलते चलें।
(१२)
दुखी मत हो
दुख में काम आओ
सुखी रहोगे।
(१३)
कैसा है देश
जाति है परिवेश
आता आवेश।
(१४)
हमारे घर
आई खुशी, लेकिन
पडौसी-दुखी।
(१५)
बाहों को फैला
ताकत है बहुत
भाई चारे में।
(१६)
संभलकर
चलना जीवन में
शत्रु अनेक।
(१७)
राम का नाम
जीवन का सहारा
सार ही सार। ?
अटल जी वाली गली, कमल सिंह का बाग, लश्कर
ग्वालियर (म.प्र.)-४७४००१ मो. ०८०८५१००८४०