सृजन - संवाद कार्यक्रम ‘‘कविता की साखी‘‘ विषयक संगोष्ठी सम्पन्न । 19 अगस्त

दिनांक: 2017-08-24
सृजन - संवाद कार्यक्रम ‘‘कविता की साखी‘‘ विषयक संगोष्ठी सम्पन्न । कवि स्व. चन्द्रकांत देवताले को दी गई श्रद्धांजलि। उदयपुर : 19 अगस्त / राजस्थान साहित्य अकादमी की ओर से ‘‘सृजन संवाद कार्यक्रम’’ के अन्तर्गत ‘‘कविता की साखी’’ में उदयपुर के प्रतिष्ठित कवियों ने अपने प्रिय कवि जयशंकर प्रसाद, निराला, रामधारी सिंह दिनकर, राहत इन्दौरी, शमीम जयपुरी, पं. विश्वेश्वर शर्मा, भगवतीलाल व्यास, मनोज देपावत आदि कवियों की कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। इस अवसर पर अकादमी अध्यक्ष डॉ. इन्दुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने सभी अतिथि कवियों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. देव कोठारी ने इस अवसर पर कहा कि इस तरह के आयोजन कवियों को जोड़ने का सराहनीय प्रयास स्वागत योग्य बताते हुए जयशंकर प्रसाद की रचना ‘‘हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती’’ का पाठ किया। सर्वप्रथम जगदीश तिवारी ने सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की सरस्वती वंदना ‘वरदे वीणा वादनी’ प्रस्तुत की। पं0 नरोत्तम व्यास ने उदयपुर के गीतकार पं0 विश्वेश्वर शर्मा के गीत प्रस्तुत करते हुए उनके गीतों में आस्था, विश्वास, भाव प्रवणता, नाद सौन्दर्य बताया। मधु अग्रवाल ने डॉ. कुंवर बेचैन की रचना ‘नदी बोली समन्दर से में तेरे पास आई हूं’। मुझे भी गा मेरे शायर में तेरी रूबाई हूं। शायर इकबाल हुसैन ‘इकबाल’ ने शमीम जयपुरी की रचना ‘दर्दे दिल की बता दवा क्या है, चारागर जा तुझे हुआ क्या है’ प्रस्तुत की। श्रीमती विजयलक्ष्मी देथा ने कवि क्रांतिधर्मा मनुज देपावत की रचना ‘आज होली जल रही है, लोहित मसी में कलम डूबोकर कवि तुम-प्रलय छंद लिख डालो’। डॉ. ज्योतिपुंज ने उदयपुर के ही प्रसिद्ध कवि डॉ. भगवतीलाल व्यास की कविता ‘आदमी को तोड़ने के लिए कहां जरूरी है, बम, मिसाइलें या हथगोले’। श्रीमती शकुन्तला सरूपरिया ने जयशंकर प्रसाद की रचना ‘तुमुल कोलाहल कलह में मै हृदय की बात रे मन की सुमधुर प्रस्तुति दी। शायर आईना उदयपुर ने राहत इंदौरी की ग़ज़ल ‘किसने दस्तक दी है, दिल पर कौन है, आप तो अंदर है बाहर कौन।’ मनमोहन ‘मधुकर’ ने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना प्रस्तुत की। विशिष्ट अतिथि प्रो. के.के. शर्मा ने केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘एक बित्ते के बराबर यह हरा ठिगना चना’’ प्रस्तुत की। अंत में अकादमी अध्यक्ष डॉ. इंदुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने ख्यातनाम कवि स्व. चन्द्रकांत देवताले को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देवताले को आधुनिक हिन्दी कविता में सर्वसाधारण और उपेक्षित जन की समस्या, पीड़ा और संताप को स्वर देने वाला महान कवि बताया । तत्पुरुष ने देवताले की प्रसिद्ध कविताएं ‘मां’ एवं ‘औरत’ का पाठ कर सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती किरणबाला जीनगर ने किया। इस संवाद संगोष्ठी में नगर के वरिष्ठ साहित्यकार सर्वश्री डॉ. राधिका लढ्ढा, गौरीकांत शर्मा, डॉ. गिरीशनाथ माथुर, श्रेणीदानचारण, रीना मेनारिया , डॉ. ममता जोशी, तरुण दाधीच, शिवदान सिंह जोलावास, भगवान लाल प्रेमी, डॉ. गोपाल ‘राजगोपाल’, डॉ. मनोज श्रीमाली, प्रेम नारायण जयसवाल, डॉ. तारा दीक्षित, डॉ. करूणा दशोरा, मुश्ताक चंचल, डॉ. वीना गौड़, दीपमाला गिडवानी, शीतल श्रीमाली, लक्ष्मणपुरी गोस्वामी आदि की गरिमामय उपस्थित रही।